फिट दिखने वाला शरीर क्या अंदर से है सुरक्षित? जिम और मैदानों में क्यों थम रही हैं सांसें
इस लेख और विषय को और विस्तार से समझते हैं ताकि यह पूरी तरह स्पष्ट हो जाए कि जिम और खेल के मैदानों में अचानक होने वाली दिल की घटनाओं के पीछे आखिर क्या वजहें हैं और इससे कैसे बचा जा सकता है।
1. हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में बुनियादी अंतर
लोग अक्सर हार्ट अटैक (Heart Attack) और कार्डियक अरेस्ट (Cardiac Arrest) को एक ही मान लेते हैं, लेकिन दोनों में बड़ा फर्क है:
- हार्ट अटैक (सर्कुलेशन की समस्या): यह एक ‘प्लंबिंग’ समस्या की तरह है। जब दिल को खून और ऑक्सीजन पहुंचाने वाली कोरोनरी धमनियों में ब्लॉकेज आ जाता है, तो दिल के उस हिस्से को ऑक्सीजन नहीं मिलती और हार्ट अटैक आता है।
- कार्डियक अरेस्ट (इलेक्ट्रिकल सिस्टम की समस्या): यह दिल के ‘बिजली के तारों’ (इलेक्ट्रिकल सिस्टम) में गड़बड़ी है। इसमें दिल अचानक धड़कना बंद कर देता है और खून पंप करना पूरी तरह रुक जाता है, जिससे कुछ ही मिनटों में व्यक्ति की जान जा सकती है।
2. कम उम्र और फिट दिखने वाले लोगों को भी जोखिम क्यों?
- लक्षणों का छिपा रहना: कोरोनरी आर्टरी डिजीज (CAD) शुरुआती चरणों में हमेशा लक्षण नहीं दिखाती। व्यक्ति रोजमर्रा के सामान्य काम आसानी से कर लेता है और उसे लगता है कि वह पूरी तरह स्वस्थ है।
- ओवर-एक्सर्शन (क्षमता से ज्यादा जोर): कई बार लोग दूसरों को देखकर या खुद को साबित करने के चक्कर में अपनी फिटनेस लेवल से बहुत ज्यादा भारी वर्कआउट करने लगते हैं। शरीर जब उस लोड के लिए तैयार नहीं होता, तो दिल पर अचानक अत्यधिक दबाव पड़ जाता है।
3. प्री-वर्कआउट सप्लीमेंट्स और एनर्जी ड्रिंक्स का खतरा
- आजकल जिम जाने वाले युवाओं में प्री-वर्कआउट ड्रिंक्स, प्रोटीन शेक, फैट बर्नर और हाई-कैफीन एनर्जी ड्रिंक्स का चलन बहुत बढ़ गया है।
- इनमें मौजूद उच्च मात्रा में स्टिमुलेंट्स (उत्तेजक पदार्थ) और कैफीन सीधे तौर पर दिल की धड़कन (Heart Rate) और ब्लड प्रेशर को अचानक तेजी से बढ़ा देते हैं। यदि इन्हें लेने के बाद तुरंत भारी वर्कआउट किया जाए, तो यह दिल की सेहत के लिए घातक साबित हो सकता है।
4. कौन से लक्षण हैं खतरे की घंटी? (चेतावनी के संकेत)
डॉक्टरों के अनुसार, यदि वर्कआउट या एक्सरसाइज के दौरान निम्नलिखित लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें कभी भी ‘सामान्य थकान’ समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए:
- सीने में भारीपन, दबाव, खिंचाव या दर्द महसूस होना।
- बिना किसी स्पष्ट कारण के अचानक बहुत ज्यादा चक्कर आना या बेहोश हो जाना।
- दिल की धड़कन का अचानक बहुत तेज या अनियमित (Palpitations) हो जाना।
- सांस का बहुत ज्यादा फूलना या थोड़ा सा चलने पर ही अत्यधिक थकान महसूस होना।
5. इससे बचाव के उपाय:
- नियमित और क्रमिक शुरुआत (Gradual Progression): यदि आप लंबे समय से वर्कआउट नहीं कर रहे हैं, तो सीधे भारी वजन या हाई-इंटेंसिटी कार्डियो से शुरुआत न करें। धीरे-धीरे अपने स्टेमिना को बढ़ाएं।
- हेल्थ चेकअप: खासकर 30-35 की उम्र के बाद या जिम ज्वाइन करने से पहले एक बार बेसिक कार्डिएक चेकअप (जैसे ट्रेडमिल टेस्ट या लिपिड प्रोफाइल) जरूर करवा लेना चाहिए, खासकर यदि परिवार में दिल की बीमारियों का इतिहास रहा हो।
- शरीर की सुनें: अपने शरीर की सीमाओं को पहचानें। यदि किसी दिन थकान ज्यादा हो या तबीयत ठीक न लगे, तो वर्कआउट स्किप करना ही समझदारी है।