भारत के साथ पनडुब्बी डील साइन करने के लिए पूरी तरह तैयार है जर्मनी: जर्मन राजदूत जैस्पर वीक

0
Gemini_Generated_Image_12emvy12emvy12em

भारत के साथ पनडुब्बी डील साइन करने के लिए पूरी तरह तैयार है जर्मनी: जर्मन राजदूत जैस्पर वीक

भारत और जर्मनी के बीच रक्षा संबंधों को एक नया और बड़ा आयाम मिलने जा रहा है। भारत में जर्मनी के राजदूत जैस्पर वीक (Jasper Wieck) ने स्पष्ट किया है कि जर्मनी भारत के साथ बहुप्रतीक्षित पनडुब्बी सौदे (Submarine Deal) पर हस्ताक्षर करने के लिए पूरी तरह तैयार है। अब इसके लिए केवल नई दिल्ली की तरफ से अंतिम मंजूरियों (Approvals) का इंतजार किया जा रहा है।

क्या है इस बड़ी डिफेंस डील की खास बातें?

  • प्रोजेक्ट 75(I) के तहत निर्माण: यह प्रस्तावित समझौता भारत के प्रोजेक्ट 75(I) के अंतर्गत आता है, जिसके तहत देश में ही छह अत्याधुनिक पारंपरिक पनडुब्बियों का निर्माण किया जाना है।
  • मेक इन इंडिया और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर: जर्मन राजदूत ने जोर देकर कहा कि यह सौदा सिर्फ तैयार पनडुब्बियों के आयात को लेकर नहीं है, बल्कि यह भारत में ही उत्पादन और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Technology Transfer) पर आधारित एक वास्तविक साझेदारी है।
  • कंपनियों की साझेदारी: इस प्रोजेक्ट के तहत जर्मनी की दिग्गज डिफेंस कंपनी थिसेंट्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS) भारत की सरकारी शिपबिल्डर कंपनी मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) के साथ मिलकर काम करेगी।
  • अनुमानित लागत: मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत लगभग 8 अरब डॉलर (यानी 70,000 से 90,000 करोड़ रुपये के बीच) आंकी गई है।

जर्मनी की नीति में ‘180 डिग्री का बदलाव’

जर्मन राजदूत जैस्पर वीक ने कहा कि जर्मनी ने रक्षा निर्यात के मामले में अपनी नीति में ‘180 डिग्री का बदलाव’ किया है और वह भारत की जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। उन्होंने कहा कि जर्मनी की ओर से सभी आंतरिक प्रक्रियाएं और अंतर-सरकारी समझौते (G2G Agreement) पूरे किए जा चुके हैं।

उन्होंने बयान देते हुए कहा, “जर्मनी की तरफ से हम कल ही इस पर हस्ताक्षर कर सकते हैं, अब यह पूरी तरह से भारतीय पक्ष और वहां की कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की अंतिम मंजूरी पर निर्भर करता है। जैसे ही भारत अपनी प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी कर लेगा, इस पर मुहर लग जाएगी।

सामरिक और रणनीतिक साझेदारी का नया दौर

बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक माहौल के बीच भारत और जर्मनी के बीच यह सहयोग बेहद अहम माना जा रहा है। इस पनडुब्बी सौदे के अलावा दोनों देश ड्रोन (मानवरहित प्रणालियों), साइबर सुरक्षा, मिसाइल और सेंसर तकनीक जैसे क्षेत्रों में भी मिलकर काम करने की संभावनाओं पर जोर दे रहे हैं। इस डील से भारतीय नौसेना की ताकत में भारी इजाफा होगा और देश के रक्षा औद्योगिक इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed