नेशनल स्टॉक Exchange (NSE) की शेयर बाजार में शानदार एंट्री: ₹1,800 पर लिस्टिंग के साथ देश की 11वीं सबसे मूल्यवान कंपनी बनी
भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में एक नए युग की शुरुआत करते हुए देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज—नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड (NSE) ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर अपने शेयरों की धमाकेदार शुरुआत की है। एनएसई का शेयर इसके तय इश्यू प्राइस ₹1,785 के मुकाबले मामूली बढ़त के साथ ₹1,800 पर लिस्ट हुआ। हालांकि, शुरुआती सुस्त शुरुआत के बाद निवेशकों की लिवाली (buying) के चलते शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली और यह उछलकर करीब ₹1,845 से ₹1,876 के स्तर तक पहुंच गया।
इस शानदार शुरुआत के साथ ही एनएसई ने देश की शीर्ष मूल्यवान कंपनियों की सूची में बड़ा स्थान हासिल कर लिया है और यह भारत की 11वीं सबसे मूल्यवान फर्म (11th most-valued firm) बन गई है।
प्रमुख हाइलाइट्स और आंकड़े:
- इश्यू प्राइस बनाम लिस्टिंग मूल्य: एनएसई के ₹22,569 करोड़ के मेगा आईपीओ का प्राइस बैंड ₹1,700 से ₹1,785 तय किया गया था, जिसके मुकाबले यह बीएसई पर 0.84% के प्रीमियम के साथ ₹1,800 पर लिस्ट हुआ।
- मार्केट कैप: इस लिस्टिंग के बाद एनएसई का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन (Market Cap) बढ़कर ₹4.53 लाख करोड़ के पार पहुंच गया है, जिससे यह अपने प्रतिद्वंद्वी बीएसई (BSE) से काफी आगे निकल गया है।
- आईपीओ की सफलता: इससे पहले एनएसई का यह तीन दिवसीय आईपीओ निवेशकों के बीच बेहद लोकप्रिय रहा था और कुल मिलाकर इसे लगभग 6 गुना (5.7x) सब्सक्रिप्शन मिला था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) ने सबसे बढ़कर हिस्सा लिया और अपने कोटे को लगभग 12.68 गुना सब्सक्राइब किया।
निवेशकों और बाजार पर प्रभाव
एनएसई के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (MD & CEO) आशीषकुमार चौहान ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि इस आईपीओ के जरिए 34 लाख से अधिक रिटेल निवेशकों को शेयर आवंटित किए गए हैं और अब एक्सचेंज के साथ एक बड़ा परिवार जुड़ गया है।
यह पूरा आईपीओ एक ऑफर फॉर सेल (OFS) था, जिसका मतलब है कि जुटाए गए पैसों से मिलने वाली पूरी राशि सीधे उन मौजूदा शेयरधारकों को जाएगी जो अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं, और एक्सचेंज को सीधे तौर पर कोई फंड नहीं मिलेगा। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि दीर्घकालिक नजरिए से एनएसई का बिजनेस मॉडल बेहद मजबूत है, हालांकि शॉर्ट टर्म में शेयरों की लॉक-इन अवधि और सप्लाई जैसे कारक इसकी चाल को तय करेंगे।